यीशै दास संभाग प्रतिनिधि (सरगुजा)की खास रिपोर्ट


विदित हो कि जिला – मनेंद्रगढ़ -चिरमिरी -भरतपुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम- पंचायत चनवारीडाड के मौहरी ग्राउंड में दिनांक 15 मई सन् 2024 को मनेंद्रगढ़ शहर के एक स्थानीय पत्रकार-( रईस अहमद )की हत्या कर लाश को फेंक दिया गया था।जो एक सबसे बड़ी वारदात में से एक था ।तथा चर्चित मामला रहा है।
जिस पर तत्कालीन पुलिस अधीक्षक एमसीबी चंद्रमोहन सिंह के दिशा-निर्देश एवं मार्गदर्शन के आधार पर फौरन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अशोक वाडेगावकर मौके पर पहुंच हालतो का जायजा लिया था। जाकर उस समय के तत्कालीन थाना प्रभारी/निरीक्षक सिटी कोतवाली मनेंद्रगढ़ अमित कश्यप द्वारा उक्त हत्याकांड की जांच कर उक्त अज्ञात आरोपीगणों की पहचान किया गया जो मृतक -की पत्नी को उक्त मामले में घटना के लगभग चंद घंटों के भीतर आरोपी बनाया गया था।और पुछताछ के पश्चात महज 72 घंटों के भीतर ही आरोपी पत्नी के प्रेमी सहित एक अन्य आरोपी जो उसका सहयोगी रहा विधिः से संघर्षरत अपचारी बालक को झारखंड के गढ़वा और प्रेमी को (ब्यौहारी)मध्य प्रदेश से (गुजरात) भागते वक्त गिरफ्तार कर उक्त सम्पूर्ण मामले की सुक्ष्म , गहनता से जांच विवेचना कर उक्त(हत्याकांड) संबंध की पुरी रिपोर्ट चार्जशीट तैयार कर तमाम मजबूत तथ्य और सबूतो के साथ मान. न्यायालय( मनेंद्रगढ़) प्रस्तुत किया गया जिसमें क्रमवार गवाहो का अलग -अलग के बयान मान. न्यायालय मनेंद्रगढ़ में लिए गए।वहीं घटना के महज 18 माह के भीतर उक्त प्रकरण में प्रथम अपर सत्र न्यायालय के न्यायधीश श्री विवेक कुमार तिवारी की बैंच ने दिनांक 4/11/25 को उक्त सभी के विरुद्ध सबूत(एविडेंस) और गवाहों के बयान सहित थाना प्रभारी निरीक्षक अमित कश्यप सहित हमराह- स्टाफ पुलिस द्वारा बेहद ही कम समय में पेश किए गए तथ्यों के आधार पर उक्त आरोपियों को दोषी करार देते हुए प्रेमी-प्रेमिका को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।वहीं एक अन्य अपचारी बालक का प्रकरण अलग से चलाया जा रहा है।जो विचाराधीन है।ऐसा सुत्र बताते हैं। उक्त न्यायालय के फैसले को मनेंद्रगढ़ शहर के पत्रकार साथियों ने सराहना करते हुए न्यायमूर्ति का आभार व्यक्त किया है।साथ ही तत्कालीन पुलिस अधीक्षक एमसीबी चंद्रमोहन सिंह सहित कोतवाली मनेंद्रगढ़ के तत्कालीन प्रभारी अमित कश्यप एवं उक्त कार्यवाही में लगी पुलिस टीम के भी योगदान का आभार जताया है। उक्त सजा अप.क्र 159/24 धारा 302 हत्या करना ,धारा 449 मृत्यु दंड से दयनीय अपराध करने के लिए गृह -अतिचार करना ,धारा 120 (बी)किसी अपराधिक घटना को अंजाम देने के उद्देश्य से षड्यंत्र रचना, एवं धारा 201 साक्ष्य/सबूत छुपाना ,शामिल रहा है। जिसमे कथित आशिक आरज़ू खान और मृतक – रईस अहमद की पत्नी सफीना खातुन को सजा सुनाई गई है। न्यायालय ने अपने फैसले में यह भी माना – कि उक्त घटना कोई आवेश में आकर कारीत समान्य घटना नहीं है। बल्कि एक षड्यंत्र रच कर सुनियोजित हत्या है।जो समाज के लिए भी खतरा है। एवं कथित तौर पर प्रेमी -प्रेमिका द्वारा जानबुझकर ऐसी घटना को कारित किया गया है।
पिडित परिवार ने कहा – भले देर लगी फैसला आने पर लेकिन हमें न्याय मिला आंखों में आसूं तो थे ।मगर संतोष यह मिला कि – आरोपियों को उम्रकैद की सजा मिली है।

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